मौनी अमावस्या: 5 दशक बाद बन रहा है ऐसा योग

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सोमवार को माघ मास की अमावस्या यानी मौनी अमावस्या के साथ ही इस दिन सोमवती अमावस्या का भी दुर्लभ संयोग है। पांच दशक बाद हो रहे इस योग में अमृत वर्षा के लिए प्रयागराज तैयार हो चुका है। इस पुण्य को हासिल करने के लिए देश और दुनिया भर से लोग यहां जुटने लगे हैं। इस तरह अलग-अलग संस्कृतियों और भाषााओं का संगम भी यहां नजर आ रहा है।

नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी
कुंभ में मौनी अमावश्या का स्नान सबसे बड़ा होता है। मान्यता है कि इस दिन संगम में स्नान से काफी पुण्य मिलता है। इस बार अमावस्या तीन फरवरी की रात 11:12 बजे लग रही है जो 4 फवरी को देर रात 1:30 बजे तक चलेगी। यह सोमवार का दिन है और त्रिग्रहीय योग व नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी से कुंभ के श्रद्धालुओं पर अमृत वर्षा होगी।

महापुण्य के लिए चल रहा पूजा-पाठ
कुछ परिवार यहां तीन दिन पहले से पहुंच चुके हैं और महापुण्य हासिल करने के लिए अलग-अलग आश्रमों में पूजा-पाठ करवा रहे हैं। संगम तट पर खुले में भी विधि-विधान से पूजन-अर्चना और जप करवा रहे हैं। गंगा के तटों पर सर्दी की परवाह किए बगैर खुले में ही रुककर भक्तिभाव से देवी-देवताओं का स्मरण कर रहे हैं।

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