गुरु पूर्णिमा पर लगेगा चंद्र ग्रहण, भारत में भी दिखेगा प्रभाव

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मंगलवार, 16 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा पर श्री सत्यनारायण व्रत, स्नान दान आदि की आषाढ़ी पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, व्यास पूजा, ऋषि वेद व्यास जी की जयंती, कोकिला व्रत यानी कोयल के रुप में भगवान शिव की विशेष पूजा और श्री शिव शयन-उत्सव मनाया जाएगा। 16 जुलाई की आधी रात को 4:32 मिनट पर सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेगा, सूर्य की कर्क संक्रांति एवं श्रावण का महीना प्रारंभ हो जाएगा। संक्रांति का पुण्यकाल 17 जुलाई की सुबह 10:56 तक रहेगा।

चातुर्मास (चौमासा) व्रत-नियम आदि भी इसी दिन से प्रारंभ हो जाएंगे।

 

16-17 जुलाई की रात खंड ग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा जो सारे भारत में स्पर्श से मोक्ष तक खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा। 2 घंटे 59 मिनट का यह ग्रहण मध्यरात्रि 1 बजकर 32 मिनट पर प्रारंभ होकर प्रात: 4 बजकर 31 मिनट पर समाप्त होगा। खंडग्रास चंद्र ग्रहण का सूतक भी मान्य होगा। जो ग्रहण आरंभ होने से 9 घंटे पहले ही लग जाएगा। सायं 4 बजकर 32 मिनट पर प्रारंभ होकर ये ग्रहण की समाप्ति के साथ ही खत्म होगा। अत: आपको जो भी शुभ काम करने हैं, वे सूतक काल से पहले ही पूरा कर लें।

 

भारत के अतिरिक्त ये ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के अधिकांश भागों में दिखाई देगा। एशिया के उत्तर-पूर्वी भाग और स्कैनडिनाविया के अधिकांश भागों में देखा नहीं जा सकेगा।

जब चन्द्रास्त होगा तो उस समय ग्रहण का प्रारम्भ न्यूजीलैण्ड के कुछ भाग, ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी भाग, उत्तर तथा दक्षिण कोरिया, चीन के उत्तरी भाग तथा रूस के कुछ भाग में देखा जा सकेगा। चन्द्रोदय के समय ग्रहण का अंतिम पड़ाव अर्जेन्टिना, चिली, बोलीविया, ब्राजील के पश्चिमी भाग, पेरु तथा, उत्तरी अटलांटिक महासागर में देखा जा सकेगा।

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