मुलेठी के चमत्कारी फ़ायदे, जाने सेवन का सही तरीका

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आज हर कोई किसी न किसी बीमारी से पीड़ित है। जिसके पीछे सबसे बड़ी वजह आपका खानपान। ऐसे में आयुर्वेद में एक ऐसी औषधि है, जो कई बीमारियों में फायदेमंद साबित हो सकती है। हम बात कर रहे हैं मुलेठी की।

आमतौर पर मुलेठी का इस्तेमाल पान में किया जाता है, लेकिन मुलेठी सर्दी-जुकाम जैसी छोटी बीमारियों के साथ-साथ आपकी कई अन्य बड़ी बीमारियों में भी वरदान साबित हो सकती है। औषधीय गुणों सें भरपूर मुलेठी कैल्शियम, ग्लिसराइजिकऐसिड, ऐंटीऑक्सिडेंट, ऐंटीबायॉटिक, प्रोटीन और वसा के गुणों से भरपूर होती है। आइए हम आपको बताते हैं कि मुलेठी कैसे आपके लिए फायदेमंद है।

मुलेठी से क्या फायदा होता है?

स्वाद में मीठी मुलेठी कैल्शियम, ग्लिसराइजिक एसिड, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक, प्रोटीन और वसा के गुणों से भरपूर होती है. इसका इस्तेमाल आंखों के रोग, मुंह के रोग, गले के रोग, दमा, दिल के रोग, घाव के उपचार के लिए सदियों से किया जा रहा है.

मुलेठी को कैसे खाये?

मुंह के छाले मुलेठी मूल के टुकड़े में शहद लगाकर चूसते रहने से लाभ होता है. मुलेठी को चूसने से खांसी और कंठ रोग भी दूर होता है. सूखी खांसी में कफ पैदा करने के लिए इसकी 1 चम्मच मात्रा को मधु के साथ दिन में 3 बार चटाना चाहिए. इसका 20-25 मिली क्वाथ प्रात: सायं पीने से श्वास नलिका साफ हो जाती है
मुलेठी की चाय कैसे बनाएं?

अदरक और मुलेठी वाली चाय बनाने की वि​धि

एक पैन लें और पानी गर्म करना शुरू करें.
पानी के उबलने पर चाय पत्ती, चीनी, मुलेठी और कद्दूकस किया हुआ अदरक डालें.
इसे ढककर रख दें और 2 मिनट तक उबालें. सर्व करें.

मुलेठी पाउडर क्या होता है?

लीकोरिस रूट यानी मुलेठी को मीठी जड़ के रूप में भी जाना जाता है। यह एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक, प्रोटीन, वसा, कैल्शियम, ग्लिसराइजिक एसिड के गुणों से भरपूर होती है। इसका इस्तेमाल घाव के उपचार, दमा, आंखें, मुंह, और गले के रोगों के उपचार के लिए सदियों से किया जा रहा है।

  • मुलेठी का मौखिक उपयोग पेट की बीमारियों, गठिया, अत्यधिक तैलीय बालों यदि के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • 1 छोटा चम्मच (5 मिलीलीटर) मुलेठी पाउडर को गर्म पानी (250 मिलीलीटर) में मिलाएं और इस मिश्रण को अच्छे से घुलने दें। मुंह के घावों को आराम देने के लिए और ठीक करने में मदद करने के लिए दिन में चार से पांच बार इस मिश्रण से गरारे करें। ध्यान रखें की आप इस मिश्रण को निगले ना।
  • इसी प्रकार, 1/4 कप (60 मिलीलीटर) गर्म पानी और 1/2 छोटा चम्मच (2.5 मिलीलीटर) मुलेठी के पाउडर को साथ में मिलाएं और गरारे करें, यह सांस को बदबू को कम करने या खत्म करने में मदद कर सकता है।
  • जुकाम, खांसी, आदि के इलाज में मदद करने के लिए मुलेठी की चाय का सेवन करें।
  • मासिक धर्म के दौरान मुलेठी की चाय पिने से शरीर में ऐंठन कम होती है। इसका अधिक लाभ लेने के लिए मासिक धर्म शुरू होने के तीन दिन पहले से ही इसका दिन में एक बार सेवन करें।
  • सांस की बदबू दूर करने के लिए आप मुलेठी को चबा भी सकते हैं।

मुलेठी के फायदे

* खांसी, जुकाम में कफ को कम करने के लिए मुलहठी का ज्यादातर उपयोग किया जाता है.
* बढ़े हुए कफ से गला, नाक, छाती में जलन हो जाने जैसी अनुभूति होती है, तब मुलहठी को शहद में मिलाकर चटाने से बहुत फायदा होता है.
* बड़ों के लिए मुलहठी के चूर्ण का इस्तेमाल कर सकते हैं. शिशुओं के लिए मुलहठी के जड़ को पत्थर पर पानी के साथ 6-7 बार घिसकर शहद या दूध में मिलाकर दिया जा सकता है.
* यह स्वाद में मधुर होने के कारण प्रायः सभी बच्चे बिना झिझक के इसे चाट लेते हैं.
* मुलहठी बुद्धि को भी तेज करती है. अतः छोटे बच्चों के लिए इसका उपयोग नियमित रूप से कर सकते हैं.
* यह हल्की रेचक होती है. अतः पाचन के विकारों में इसके चूर्ण को इस्तेमाल किया जाता है. विशेषतः छोटे बच्चों को जब कब्ज होती हैं, तब हल्के रेच के रूप में इसका उपयोग किया जा सकता है.
* छोटे शिशु कई बार शाम को रोते हैं. पेट में गैस के कारण उन्हें शाम के वक्त पेट में दर्द होता है, उस समय मुलहठी को पत्थर पर घिसकर पानी या दूध के साथ पिलाने से पेटदर्द शांत हो जाता है.
* मुलहठी की मधुरता से पित्त का नाश होता है. आमाशय की बढ़ी हुई अम्लता एवं अम्लपित्त जैसी व्याधियों में मुलहठी काफी उपयुक्त सिद्ध होती है.
* आमाशय के अंदर हुए व्रण (अलसर) को मिटाने के लिए एवं पित्तवृद्धि को शांत करने के लिए मुलहठी का उपयोग होता है. मुलहठी को मिलाकर पकाए गए घी का प्रयोग करने से अलसर मिटता है.
* यह कफ को आसानी से निकालता है. अतः खांसी, दमा, टीबी एवं स्वरभेद (आवाज बदल जाना) आदि फेफड़ों की बीमारियों में बहुत ही लाभदायक है.
* कफ के निकल जाने से इन रोगों के साथ बुखार भी कम हो जाता है. इसके लिए मुलहठी का एक छोटा टुकड़ा मुंह में रखकर चबाने से भी फायदा होता है.
* पेशाब की जलन मुलहठी के सेवन से कम होती है और पेशाब की रुकावट दूर होती है.
* मुलहठी शरीर के भीतरी एवं बाहरी जख्मों को जल्दी भरता है, अतः जहां पर जख्म से रक्तस्राव होता है, उस पर मुलहठी का उपयोग फायदेमंद होता है.
* केवल मुलहठी के चूर्ण के सेवन से गुदा से होनेवाला रक्तस्राव, वह चाहे जिस वजह से हो, बंद हो जाता है. जख्मों पर भी मुलहठी का लेप करें. इससे रक्तस्राव रुक जाता है और जख्म ठीक हो जाता है.
* त्वचा रोगों में भी मुलहठी लाभकारी है. चेहरे के मुंहासों को दूर करने के लिए मुलहठी का लेप बनाकर इस्तेमाल किया जाता है. इससे त्वचा का रंग निखर आता है, त्वचा की जलन और सूजन दूर होती है.
* यौवन को बनाए रखने के लिए इसका भीतरी एवं बाहरी प्रयोग काफी लाभदायी होता है.
* गुदा से रक्तस्राव होने पर मुलहठी आधा ग्राम, काली मिट्टी एक ग्राम और शंखभस्म 250 मि.ग्राम एक साथ मिलाकर शहद और चावल के धोबन के साथ दिन में चार बार सेवन करने से लाभ होता है.
* मुलहठी 1/2 ग्राम, पिपलामूल 1/2 गा्रम में गुड़, शहद और घी को स्वाद के अनुसार मिलाकर 3-4 बार सेवन करने से खांसी से राहत मिलती है.

  • दो सप्ताह से ज़्यादा मुलेठी की बड़ी मात्रा लेना हानिकारक हो सकता है। यह हाई बीपी, द्रव प्रतिधारण और चयापचय असामान्यताएंजैसे दुष्प्रभावों का कारण बन सकती है।
  • यदि आप मूत्रल या हाई बीपी के लिए दवाईयाँ ले रहे हैं, तो इस जड़ी बूटी को लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें।
  • अगर आप मधुमेह, गुर्दे की बीमारी या कम पोटेशियम के स्तर से परेशान हैं, तो इस जड़ी बूटी को लेने से पूरी तरह बचें।
  • यह जड़ी बूटी गर्भवती महिलाओं या बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है।
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