धनतेरस पर सोना नहीं पीतल खरीदें

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कार्तिक मास में त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व है। विशेषकर चिकित्सा एवं औषधि विज्ञान के लिए यह शुभ दिन माना गया है। अधिकांश आयुर्वेदिक औषधियाँ इस दिन निर्माण के उपरांत अभिमंत्रित की जाती है। मान्यता है कि भगवान धन्वंतरी अमृत कलश लेकर समुद्र मंथन से इसी दिन प्रकट हुए थे।

इस दिन सायंकाल यम को दीपदान किया जाता है। कहते हैं इससे यमराज के भय से छुटकारा मिलता है। गृहलक्ष्मी अगर दीपदान करें तो पूरे परिवार के रोग-शोक नष्ट होते हैं। व्यापारी वर्ग के लिए इस दिन बहीखाते खरीदने का महत्व है। इस दिन खरीदे बहीखाते गद्दी पर स्थापित किए जाते हैं और दीपावली पर पूजे जाते हैं। इस दिन तिजोरी में अक्षत रखे जाते हैं। ऐसा करने से तिजोरी में कुबेर का वास होता है। लक्ष्मीजी के आह्वान का भी यही दिन होता है।

पौराणिक मान्यता है कि माँ लक्ष्मी को विष्णु जी का श्राप था कि उन्हें 13 वर्षों तक किसान के घर में रहना होगा। श्राप के दौरान किसान का घर धनसंपदा से भर गया। श्रापमुक्ति के उपरांत जब विष्णुजी लक्ष्मी को लेने आए तब किसान ने उन्हें रोकना चाहा। लक्ष्मीजी ने कहा कल त्रयोदशी है तुम साफसफाई करना, दीप जलाना और मेरा आह्वान करना। किसान ने ऐसा ही किया और लक्ष्मी की कृपा प्राप्त की । तब ही से लक्ष्मी पूजन की प्रथा चल पड़ी।

इस धनतेरस की विशेष बात यह है कि इस दिन सोना नहीं खरीदें क्योंकि इस दिन सोना खरीदने से घर में चंचलता आ सकती है । बल्कि पुष्य नक्षत्र में खरीदा सोना इस दिन विधिवत पूजा जा सकता है । इससे घर में लक्ष्मी का शुभ स्थायी वास होता है।

इस दिन पीतल और चाँदी खरीदना चाहिए क्योंकि पीतल भगवान धन्वंतरी की धातु है। पीतल खरीदने से घर में आरोग्य, सौभाग्य और स्वास्थ्य की दृष्टि से शुभता आती है।

चाँदी कुबेर की धातु है। इस दिन चाँदी खरीदने से घर में यश, कीर्ति, ऐश्वर्य और संपदा में वृद्धि होती है।

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