फलाहार बनाने के कुछ बहुत ही उपयोगी टिप्स – अवश्य पढ़ें

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नवरात्रि के दिनों में बहुत से लोग आठ दिनों के लिए व्रत रखते हैं (पड़वा से अष्टमी), और केवल फलाहार पर ही आठों दिन रहते हैं. फलाहार का अर्थ है, फल एवं और कुछ अन्य विशिष्ट सब्जियों से बने हुए खाने. फलाहार में सेंधा नमक का इस्तेमाल होता है. नवरात्रि के नौवें दिन भगवान राम के जन्म की रस्म और पूजा (रामनवमी) के बाद ही उपवास खोला जाता है. जो लोग आठ दिनों तक व्रत नहीं रखते, वे पहले और आख़िरी दिन उपवास रख लेते हैं (यानी कि पड़वा और अष्टमी को).

साबूदाना भिगोते वक्त रखें ख्याल

व्रत के दौरान ज्यादातर चीजें साबूदाना से बनती हैं. आप इससे बनी चीजें खाना भी पसंद करते हैं क्योंकि इससे कोई फलाहारी पकवान जल्दी और आसानी से बच जाता है. अगर साबूदाने को ज्यादा देर तक भिगोकर रखेंगे तो यह तलने में तेल और पकने में समय भी ज्यादा लेगा. तभी आप देखते होंगे कि इसके बड़े तलने में बहुत ज्यादा तेल लगता है. साबूदाने को एक निश्चित समय तक ही भिगोकर रखें. अगर इसका ऊपरी हिस्सा पारदर्शी रहेगा तो यह इस्तेमाल के लिए बढ़िया है. अच्छी तरह भिगोकर रखे गए साबूदाने में तेल भी कम लगता है. साबूदाने को दबाकर भी इसकी पहचान कर सकते हैं कि यह अच्छी फूल गया है या नहीं.

तलने से बेहतर है मूंगफली को रोस्ट कर लें

फलाहार के बहुत सारे व्यंजन बनाने में मूंगफली का इस्तेमाल होता है. इसे किसी भी पकवान में डालने से पहले ज्यादातर लोग तल देते हैं जो कि गलत तरीका है. तलने से बढ़िया है इसे तवे या कढ़ाई में भून लें. बिना तेल डाले हल्का-सा सुनहरा या भूरा होने तक भून लें. ऐसा करने से साबूदाने की खिचड़ी, बड़े या फिर दूसरी चीजों में डालकर बनाने में कम तेल लगेगा.

सिंघाड़े के आटे को इस तरह से गूंदें
सिंघाड़े के आटे को सामान्य आटे की तरह न गूंदें. इसका आटा कॉर्नफ्लोर की तरह होता है. इसमें अगर ज्यादा पानी डाल दिया तो फिर इसे गूंदने में बहुत दिक्कत आ सकती है. इससे बचने के लिए इसे गूंदते वक्त हल्का-सा तेल मिलाएं फिर ऊपर से थोड़ा-थोड़ा पानी डालते जाएं और गूंदते जाए.

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